रांची: सहायक आचार्य नियुक्ति (कक्षा 6 से 8) परीक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने दो वर्षीय बीएड (B.Ed) किया है, लेकिन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में अपात्र घोषित कर दिया गया था।
इस मामले में याचिकाकर्ता विप्लव दत्त द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है, जिसके बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत 14 जुलाई (सोमवार) को इस मामले पर निर्णय सुना सकती है।
दो वर्षीय बीएड को लेकर है विवाद
प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने दो साल का बीएड कोर्स पूरा किया है, जो कि एक वर्षीय बीएड से कहीं अधिक उपयुक्त है। इसके बावजूद जेएसएससी ने यह कहते हुए चयन नहीं किया कि विज्ञापन में एक वर्षीय बीएड धारकों को ही पात्र बताया गया था।
वकील ने दलील दी कि यह निर्णय शिक्षा के गुणवत्ता मानकों के विरुद्ध है, क्योंकि दो वर्षीय बीएड प्रशिक्षित शिक्षक को अधिक समर्पित और शिक्षण के लिए उपयुक्त बनाता है।
जेएसएससी ने विज्ञापन का हवाला दिया
वहीं, जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट शर्तों और पात्रता के आधार पर संचालित की गई थी। आयोग ने विज्ञापन में पहले ही उल्लेख किया था कि सिर्फ एक वर्षीय बीएड करने वाले उम्मीदवार ही पात्र होंगे। अतः नियमों के तहत ही याचिकाकर्ता को अयोग्य ठहराया गया।
अब सबकी निगाहें 14 जुलाई पर
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या निर्णय सुनाता है, क्योंकि इससे सैकड़ों अभ्यर्थियों के भविष्य का रास्ता तय हो सकता है।